Friday, September 20, 2019

श्री दुर्गादेवी जी की आरती shri durga devi ji ki aarti

श्री दुर्गादेवी जी की आरती


shri durga devi ji ki aarti
shri durga devi ji ki aarti


जगजननी जय ! जय !! माँ , जगजननी जय ! जय !! माँ
भयहारिणि भवतारिणि , भवभामिनि जय जय ॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
तू ही सत-चित-सुखमय शुद्ध ब्रह्मरूपा ।
सत्य सनातन सुन्दर पर शिव-सुरभूपा ॥१॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी ।
अमल अनन्त अगोचर अज आनँदराशी ॥२॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
अविकारी , अघहारी , अकल , कलाधारी ।
कर्ता विधि , भर्ता हरि , हर सँहारकारी ॥३॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
तू विधिवधू , रमा , तू उमा , महामाया ।
मूल प्रकृति विद्या तू , तू जननी जाया ॥४॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
राम , कृष्ण तू , सीता , ब्रजरानी राधा ।
तू वांछाकल्पद्रूम , हारिणि सब बाधा ॥५॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
दश विद्या , नव दुर्गा , नानाशस्त्रकरा ।
अष्टमातृका , योगिनि , नव नव रूप धरा ॥६॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
तू परधामनिवासिनि , महाविलासिनि तू ।
तू ही श्मशानविहारिणि , ताण्डवलासिनि तू ॥७॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
सुर – मुनि - मोहिनि सौम्या तू शोभाऽऽधारा ।
विवसन विकट स्वरूपा , प्रलयमयी धारा ॥८॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
तू ही स्नेह - सुधामयी , तू अति गरलमना ।
रत्न - विभूषित तू ही , तू ही अस्थि-तना ॥९॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
मूलाधारनिवासिनि , इह-पर-सिद्धिप्रदे ।
कालातीता काली , कमला तू वरदे ॥१०॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
शक्ति शक्तिधर तू ही नित्य अभेदमयी ।
भेदप्रदर्शिनि वाणी विमले ! वेदत्रयी ॥११॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
हम अति दीन दुखी मा ! विपत-जाल घेरे ।
हैं कपूत अति कपटी पर बालक तेरे ॥१२॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥
निज स्वभाववश जननी ! दया दृष्टि किजै ।
करुणा कर करुणामयी ! चरण-शरण दीजै ॥१३॥
॥ जगजननी जय ! जय !! माँ.. ॥



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